ओवरटाइम के गणना को लेकर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय, ओवरटाइम वेतन की गणना में HRA एवं TA होंगे शामिल

ओवरटाइम के गणना को लेकर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय, ओवरटाइम वेतन की गणना में HRA एवं TA होंगे शामिल

ओवरटाइम के गणना को लेकर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय, ओवरटाइम वेतन की गणना में HRA एवं TA होंगे शामिल

सुप्रीम कोर्ट ने रक्षा उत्पादन इकाइयों के कर्मचारियों सहित कारखाना कर्मचारियों के हित में एक दूरगामी और महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए ओवरटाइम वेतन की गणना से जुड़े विवाद पर अंतिम मुहर लगा दी है। Union of India बनाम Heavy Vehicles Factory Employees’ Union मामले में शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि ओवरटाइम वेतन की गणना करते समय कर्मचारियों को मिलने वाले भत्तों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

क्‍या है मामलाा

यह मामला फैक्ट्रीज़ एक्ट, 1948 की धारा 59(2) की व्याख्या से संबंधित था, जिसमें “साधारण वेतन दर (Ordinary Rate of Wages)” की परिभाषा दी गई है। अदालत के समक्ष प्रश्न यह था कि क्या हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA), क्लोदिंग व वाशिंग अलाउंस और स्मॉल फैमिली अलाउंस जैसे प्रतिपूरक भत्तों को ओवरटाइम वेतन की गणना में शामिल किया जाना चाहिए या नहीं।

supreme-court-historic-decision-regarding-inclusion-of-hra-and-ta-in-the-calculation-of-overtime-pay

केन्‍द्र सरकार एवं कर्मचारी यूनियनों का पक्ष 

केंद्र सरकार का तर्क था कि ये भत्ते प्रतिपूरक प्रकृति के हैं और विभिन्न मंत्रालयों द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापनों के अनुसार इन्हें ओवरटाइम वेतन की गणना से बाहर रखा जाना चाहिए। अदालत में केन्‍द्र सरकार ने यह भी दलील दी कि इन भत्तों को शामिल करने से सरकारी कारखानों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। जबकि, कर्मचारी यूनियनों का कहना था कि कानून की स्पष्ट व्‍याख्‍या के अनुसार कर्मचारी को उस समय मिलने वाले सभी भत्ते “साधारण वेतन” का हिस्सा हैं और ओवरटाइम का भुगतान इन्हीं के आधार पर होना चाहिए।

शीर्ष अदालत की टिप्‍पणी

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि फैक्ट्रीज़ एक्ट एक कल्याणकारी कानून है, जिसका उद्देश्य श्रमिकों को शोषण से बचाना और उनके स्वास्थ्य व कल्याण की रक्षा करना है। अदालत ने स्पष्ट किया कि धारा 59(2) में केवल दो ही अपवाद बताए गए हैं—बोनस और स्वयं ओवरटाइम का वेतन। इसके अतिरिक्त किसी भी भत्ते को बाहर करने का अधिकार न तो किसी मंत्रालय को है और न ही कार्यपालिका को।

कोर्ट ने यह भी अहम टिप्पणी की कि संसद द्वारा बनाए गए कानून की अलग-अलग मंत्रालय अलग-अलग व्याख्या नहीं कर सकते। कार्यपालिका द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन कानून के प्रावधानों पर हावी नहीं हो सकते। यदि ऐसा स्वीकार किया गया तो श्रम कानूनों का मूल उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाएगा।

कर्मचारियों पर असर

अंततः, सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए केंद्र सरकार की अपील खारिज कर दी। यह निर्णय न केवल रक्षा उत्पादन इकाइयों के कर्मचारियों, बल्कि देशभर के कारखाना श्रमिकों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला ओवरटाइम भुगतान से जुड़े भविष्य के मामलों में एक मजबूत मिसाल बनेगा और श्रमिक अधिकारों को नई मजबूती प्रदान करेगा।

Click to view/download Supreme Court Judgement

Follow us on Telegram ChannelTwitter and Facebook for all the latest updates

COMMENTS