8th Pay Commission Fitment Factor: जानें अपना मूल वेतन

8th Pay Commission Fitment Factor: जानें अपना मूल वेतन

8th Pay Commission Fitment Factor: जानें अपना मूल वेतन

आठवीं केंद्रीय वेतन आयोग (सीपीसी) के गठन के पश्चात केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनर्स का ध्‍यान मुख्य रूप से एक ही बात पर केंद्रित हैं — फिटमेंट फैक्टर । हालांकि यह केवल एक सरल गुणक प्रतीत होता है, पर वेतन संरचना, पेंशन तथा अन्‍य वित्तीय लाभ तय करने में फिटमेंट फैक्टर का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

सातवीं सीपीसी में फिटमेंट फैक्टर और आठवीं सीपीसी से उम्‍मीद

सातवीं सीपीसी में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, जिससे न्यूनतम मूल वेतन 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हो गया था। विशेषज्ञों और यूनियनों का अनुमान है कि आठवीं सीपीसी में फिटमेंट फैक्टर 1.83 से 2.86 के बीच हो सकता है।

फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह कैसे काम करता है?

फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक होता है जिससे मौजूदा मूल वेतन को गुणा कर नई वेतन निर्धारित की जाती है। सरल भाषा में कहें तो, यदि किसी कर्मचारी का मौजूदा मूल वेतन 18,000 रुपये है और फिटमेंट फैक्टर 2.57 है, तो नया मूल वेतन 18,000 × 2.57 = 46,260 रुपये होगा। यह न केवल मूल वेतन में वृद्धि करता है, बल्कि महंगाई भत्ता (डीए), मकान किराया भत्ता (एचआरए) और यात्रा भत्ता (टीए) जैसे अन्य भत्तों के निर्धारण का आधार भी होता है।

वेतन आयोगों में फिटमेंट फैक्टर का निर्धारण मुद्रास्फीति दर, जीवनयापन लागत सूचकांक, परिवार की संख्या और वित्तीय स्थिरता जैसे तत्वों के आधार पर किया जाता है। सातवीं सीपीसी में डीए को 125% से रीसेट कर शून्य कर दिया गया था, जिससे कुल वेतन में वृद्धि लगभग 23-25% तक सीमित रही। आठवीं सीपीसी के तहत वर्तमान डीए 58% पर है, जो लागू होने तक 65% से ऊपर पहुंच सकता है। इस कारण मध्यम फिटमेंट फैक्टर (जैसे 2.13) भी वास्तविक आय में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी कर सकता है।

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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

नीचे दी गई तालिका में पिछले वेतन आयागों द्वारा मूल वेतन में किए गए बढ़ोत्‍तरी को दर्शाती है:

वेतन आयोग कार्यान्‍वयन तिथि फिटमेंट फैक्‍टर न्‍यूनतम मूल वेतन (रूपये में) कुल वेतन वृद्धि (%)
छठा 1 जनवरी 2006 1.86 7,000 20-25
सातवां 1 जनवरी 2016 2.57 18,000 23-25
आठवां (अनुमानित) 1 जनवरी 2026 1.83-2.86 32,940-51,480 20-34

छठे आयोग के तहत फिटमेंट फैक्टर 1.86 निर्धारित किया गया था, जो मुद्रास्फीति को ध्यान में रखकर वेतन की उपयुक्तता सुनिश्चित करता था। सातवें आयोग में 2.57 का चयन एकसमानता (यूनिफॉर्म अप्रोच) को प्राथमिकता देता था, हालांकि यूनियन इसे अपर्याप्त समझती थी। आठवें आयोग के लिए, पारिवारिक इकाई का मान 3 से बढ़ाकर 3.5-3.6 करने का अनुमान है, जो मूल वेतन में लगभग 20% अतिरिक्त वृद्धि जोड़ सकता है।

आठवीं CPC के संदर्भ में संभावित फिटमेंट फैक्टर

आठवें सीपीसी के फिटमेंट फैक्टर के संबंध में विशेषज्ञों के विचार भिन्न-भिन्न हैं, किन्तु अधिकांश अनुमान 1.83 से 2.86 के बीच केन्द्रित हैं। यह सीमा मुद्रास्फीति (वर्तमान में 5-6%), आने वाले 18 महीनों में 7% अतिरिक्त डीए वृद्धि, तथा 3.5% वार्षिक वेतन वृद्धि (दो वर्षों में कुल 7%) पर आधारित है।

कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की अपेक्षाएं

कर्मचाारी संघों की मांग 40-50% कुल वेतन वृद्धि की रही है, जिसमें मूल वेतन में 50% डीए का विलय शामिल है। निम्‍न पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को ज्यादा फैक्टर (जैसे 2.86) की अपेक्षा है, ताकि निजी क्षेत्र एवं सरकारी क्षेत्र के वेतन के अंतर को कम किया जा सके। जेपी मॉर्गन के रिपोर्ट के अनुसार, अधिक फिटमेंट फैक्टर से घरेलू उपभोक्ता खर्च बढ़ेगा, जिससे शेयर बाजार को प्रोत्साहन मिलने की उम्‍मीद है। पेंशनधारक विशेष रूप से प्रसन्न हैं, क्योंकि यह उनकी मासिक आय पर सीधा प्रभाव डालेगा।

यूनियनों की चिंताएं और चुनौतियां

एनसी जेसीएम और कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉयी ने सरकार से मांग की है कि फिटमेंट फैक्टर को कम से कम 2.86 किया जाए, अन्यथा विरोध प्रदर्शन होंगे।

सरकार का रुख

सरकार वित्तीय अनुशासन पर ध्यान केंद्रित कर रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि वेतन आयोग द्वारा फिटमेंट फैक्टर का निर्धारण आर्थिक हालत, उत्पादकता और राज्यों के वित्तीय स्थिति पर असर को ध्यान में रख कर ही किया जाएगा। जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता वाली समिति स्टेकहोल्डर्स से सलाह ले रही है, पर यूनियनों के मांगों पर मौन है। संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार द्वारा इस पर स्पष्टीकरण दिया जा सकता है।

निष्कर्ष

आठवीं सीपीसी में फिटमेंट फैक्टर का अनुमान 2.86 तक होने से न सिर्फ कर्मचारियों के आर्थिक स्थिति में सुधार लाएगा बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी बल दे सकता है। जबकि दूसरी ओर, यूनियनों की 2.86 की फिटमेंट फैक्‍टर की मांग पूरी न होने पर विवाद भी उत्पन्न हो सकता है। कर्मचारी संगठनों को उम्मीद है कि आयोग सभी पक्षों के हित को देखते हुए निष्पक्ष होकर ही निर्णय लेगा।

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। 8वें वेतन आयोग से संबंधित किसी भी आधिकारिक जानकारी के लिए कृपया भारत सरकार के संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट देखें। 8वें वेतन आयोग के नियम और लाभ सरकार के निर्णयों पर निर्भर करते हैं। किसी भी प्रकार की गलत जानकारी के लिए लेखक जिम्मेदार नहीं होगा। कृपया सभी जानकारी की पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से अवश्य करें।

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