Pay Commission for non-executive employees of PSUs / पीएसयू के गैर-कार्यकारी कर्मचारियों के लिए वेतन आयोग – Rajyasabha Q and A

Pay Commission for non-executive employees of PSUs / पीएसयू के गैर-कार्यकारी कर्मचारियों के लिए वेतन आयोग – Rajyasabha Q and A

Pay Commission for non-executive employees of PSUs / पीएसयू के गैर-कार्यकारी कर्मचारियों के लिए वेतन आयोग – Rajyasabha Q and A

GOVERNMENT OF INDIA
MINISTRY OF FINANCE
DEPARTMENT OF PUBLIC ENTERPRISES
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RAJYA SABHA
UNSTARRED QUESTION NO. 1501
TO BE ANSWERED ON THE 20th December, 2022

Pay Commission for non-executive employees of PSUs

No. 1501. Shri Dhiraj Prasad Sahu:

Will the Minister of Finance be pleased to state:

(a) the reasons behind not constituting any Pay Commission for all the non-executive employees working in the public sector;

(b) the reasons behind the disparity that the salary hike of officers working in the same public sector is decided by the Pay Revision Committee while the salary hike of non-executive employees is done as a result of bargaining between the unions and the management; and

(c) whether the percentage of increase in pay and allowances of officers and employees working in the same PSU 1s fixed equally, if not, the reasons thereof?

ANSWER

THE MINISTER OF STATE FOR FINANCE
(DR. BHAGWAT KISHANRAO KARAD)

(a) & (b) As per convention, the revision of wages of unionised workmen/workers (non-executive employees) of Central Public Sector Enterprises (CPSE) are done as per the Wage Settlement arrived at between Trade Union/Association and the management of the CPSE concerned under the broad parameters fixed by the Government.

While approving the pay revision with effect from 01.01.1992, Government decided that the next pay revision of CPSE executives and non-unionised supervisors would be effective from 01.01.1997 and would be on the basis of recommendations of a Committee in order to bring about the element of equity and fair play. In pursuance of this decision, Government set up the 1st Pay Revision Committee (PRC) vide resolution dated 10.12.1996. Since then, two more PRC has been constituted to review the structure of pay scales, allowances, perquisites, and other benefits for the Board level functionaries, Below board level executives and Non-unionised supervisory staff in CPSE taking into account the salary, emoluments, incentives and the other benefits available to them and suggest changes which may be desirable, feasible and affordable.

View :  HCOs under CGHS : Major recommendation of the Committee for revamping CGHS and action taken thereon

(c) The percentage of increase in pay and allowances of officers and employees working in the same CPSE is not fixed equally since both sets of employees are separate entity and are governed by separate sets of rules/instructions of pay revision issued by government from time to time. The periodicity of wage revision of unionised workmen/workers and pay revision of executives and non-unionised is also different.

in-parliament-updates

भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
लोक उद्यम विभाग
राज्य सभा
अतारांकित प्रश्न संखया 1501

दिनांक 20 दिसम्बर, 2022 को उत्तर देने के लिए

पीएसयू के गैर-कार्यकारी कर्मचारियों के लिए वेतन आयोग

1501. श्री धीरज प्रसाद साहू:

क्या वित्त मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि :

(क) सार्वजनिक क्षेत्र में काय करने वाले सभी गैर-कार्यकारी कर्मचारियों के लिए वेतन आयोग का गठन नहीं किए जाने के क्या कारण हैं;

(ख) एक ही सार्वजनिक क्षेत्र में कार्य करने वाले अधिकारियों की वेतन वृद्धि तो वेतन संशोधन समिति द्वारा तय की जाती है जबकि गैर-कार्यकारी कर्मचारियों की वेतन वृद्धि यूनियनों और प्रबंधन के बीच सौदेबाजी द्वारा किये जाने के क्या कारण हैं; और

(ग) क्या एक ही पीएसयू में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के वेतन एवं भत्‍तों में वृद्धि का प्रतिशत समान रूप से निर्धारित किया जाता है, यदि नहीं, तो इसके क्‍या कारण हैं?

View :  Admission in Kendriya Vidyalayas against abolished quota : Loksabha Starred Question No. 12

उत्तर
वित्त राज्य मंत्री
(डॉ. भागवत किशनराव कराड)

(क) और (ख): परंपरा के अनुसार, सरकार द्वारा निधारित व्यापक मानदण्डों के अंतर्गत ट्रेड यूनियन/एसोसिएशन और संबंधित सीपीएसई के प्रबंधन के बीच हुए वेतन समझौते के अनुसार केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उदयमों (सीपीएसई) के संघीकृत कामगारों/कर्मचारियों (गैर-कार्यकारी कर्मचारियों) के वेतन में संशोधन किया जाता है।

दिनांक 01.01.1992 से प्रभावी वेतन संशोधन को मंजूरी देते हुए, सरकार ने फैसला किया कि सीपीएसई के अधिकारियों और गैर-संघबदूध पर्यवेक्षकों का अगला वेतन संशोधन दिनांक 01.01.1997 से प्रभावी होगा और एक समिति की सिफारिशों के आधार पर होगा ताकि समानता और निष्पक्षता का तत्व लाया जा सके। इस निर्णय के अनुसरण में, सरकार ने दिनांक 10.12.1996 के संकल्प द्वारा प्रथम वेतन संशोधन समिति (पीआरसी) की स्थापना की। तब से, वेतन, परिलब्धियों प्रोत्साहन और उन्हें उपलब्ध अन्य लाभ को ध्यान में रखते हुए बोर्ड स्तर के अधिकारियों, बोर्ड स्तर से नीचे के अधिकारियों और सीपीएसई में गैर-संगठित पर्यवेक्षी कर्मचारियों के लिए वेतनमान, भत्ते, अनुलाभ ओर अन्य लाभों की संरचना की समीक्षा करने के लिए और उन बदलावों का सुझाव देने के लिए जो वांछनीय, व्यवहार्य और वहनीय हो सकते हैं, के लिए दो और पीआरसी का गठन किया गया है।

(ग): एक ही सीपीएसई में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में वृद्धि का प्रतिशत समान रूप से निर्धारित नहीं किया जाता है क्योंकि कर्मचारियों के दोनों सेट अलग-अलग इकाई हैं और समय-समय पर सरकार द्वारा जारी वेतन संशोधन के नियमों/अनुदेशों के अलग-अलग सेटों द्वारा शासित होते हैं। संघीकृत कामगारों/कर्मचारियों के वेतन संशोधन और कार्यपालकों तथा गैर-संघीकृतों के वेतन संशोधन की आवधिकता भी भिन्न-भिन्न होती है।

View :  Bonus to Non-Gazetted Officers of Autonomous Institutions/ Organisations: Clarification स्वायत्त संस्थाओं/संगठनों के अराजपत्रित अधिकारियों को बोनस: स्‍पष्‍टीकरण

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Source: Loksabha

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